पुरुष जाति को नपुंसकता का श्राप देवी संध्या के कारण मिला। देवी संध्या ने ब्रह्मा जी की दृष्टि से दुखी होकर भगवान विष्णु की आराधना की। उन्होंने तीन वरदान मांगे, जिसमें यह भी शामिल था कि जो भी पुरुष उन्हें देखेगा, वह नपुंसक हो जाएगा। इस तरह, पुरुषों में काम भावना का उदय केवल युवा अवस्था में होता है।