कर्मा बाई, एक साधारण किसान की बेटी, भगवान जगन्नाथ को अपनी खिचड़ी से प्रसन्न करती हैं। उनके प्रेम और भक्ति से भगवान नियम तोड़कर उनका भोग स्वीकार करते हैं। अंत में, राजा गजपति ने यह सुनिश्चित किया कि कर्मा बाई का नाम हमेशा मंदिर की परंपरा में जिंदा रहे।